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Tuesday, September 6, 2016

Comics Review : Yeh Hai Doga



Comics Name : Yeh hai Doga
Volume : Doga
Issue Number : 2
Publisher : Raj Comics
Release Date : 1 January 1993
Author: Tarun Kumar Wahi, sanjay Gupta
Penciler: Manu

जिस कहानी का परिचय ही भर मिलता है ' कर्फ्यू ' में, वही कहानी है 'ये है डोगा '।  यह कहानी  अदरक चाचा की ज़ुबानी है।  इसमें भी डोगा कैसे बना ये दिखाया गया है। बस इस बार कहानी अदरक  चाचा की नज़र  से है।  इसी में अदरक चाचा को पहली बार दिखाया गया है  और लायन जिम  से सूरज का रिश्ता भी बख़ूबी दिखाया गया है।

 चित्रों की बात करें तो एक ही बात कहूँगा की मनु जी ने  कमाल कर दिया । उनके चित्रित क़िरदार सजीव हो उठते है। कलरिंग बहुत ही बढ़िया हुई है।   पढ़ते वक़्त बिल्कुल महसूस नहीं होता की कॉमिक्स पढ़ी जा रही है। यह उस तरह की कॉमिक्स है जिसे आप बार-बार पढ़ना चाहेंगे ।

मेरी तरफ़ से इस कॉमिक्स को 10 में से 9 गोलियाँ ।

Reprint cover:

Friday, April 1, 2016

Comics Review: Curfew

आज मैंने राज कॉमिक्स द्वारा प्रकाशित कॉमिक्स "कर्फ्यू " पढ़ी । मैं हमेशा से ही डोगा का प्रशंसक रहा हूँ । डोगा की सभी कहानियां ज्यादातर वास्तविकता के ज़्यादा करीब रहती हैं । यही कॉमिक्स है डोगा की सबसे पहली कॉमिक्स । कॉमिक्स नार्मल पेपर पर है.। बेहतरीन कहानी और चित्रों के साथ ये कॉमिक शुरू करती है ऐसे जलजले को जो आज तक भी ख़त्म नहीं हुआ.। डोगा मशहूर है अपनी सिर्फ एक बात से और वह है उसकी ये सोच - 'डोगा जुर्म को ख़त्म नहीं करता बल्कि उसे जड़ से उखड फेंकता है '।  डोगा की ओरिजिन के बारे में जिस तरह से दिखाया गया है वह बहुत ही दिलचस्प है ।

Original Cover


 

और कुछ बताने से पहले थोड़ा सा डोगा के बारे में --
"जुर्म की गलियों से निकला वह कुत्ता है डोगा जो जुर्म को काटने और चीर फाड़ डालने को उतारू है।  डाकू हलकान सिंह को पुलिस से भागते हुए  मिला एक नवजात बच्चा । वो उसके सहारे हो जाता है फ़रार । उसको नाम देता है 'कुत्ता'। एक दिन एक लड़की को बंदी बन लेता है हलकान । वो लड़की  उस कुत्ते को  बुलाती है सूरज । जब सूरज को पता चलता है की हलकान उस लड़की को मार देगा तो उस लड़की को बचा लेता है और हलकान के अड्डे पर पुलिस रेड पड़वा देता है   और  खुद  पहुंच जाता हैँ  मुम्बई । उसके आगे क्या होता है यही है सारी  कहानी। जिस कुत्ते का उसने नक़ाब पहना उसकी वफादारी भी भरपूर निभाई । हलकान सिंह की पहली गोली खाकर चुकाता  है अपना क़र्ज़ और  उसे मारकर निभाता है इंसानियत का फ़र्ज़। पर अभी उसपर इंसानियत का एक क़र्ज़ बाकी है इसलिए हर रोज़ रात को कुत्ते का नकाब पहनकर उसे चुकाता है।"
कहानी की शुरुआत बेहद नाटकीय रूप से होती है फिर कहानी में हलकान सिंह पर ध्यान केंद्रित किया जाता है ।   और फिर उसके बाद कहानी के निष्कर्ष पर पहुंचते हैं जहाँ डोगा अदरक चाचा की बाँहों में खून बहाए  है।
कॉमिक्स का टाइटल ही सब कुछ बखान कर देता है। 'कर्फ्यू '।
'कर्फ्यू' उस दिन जिस दिन हलकान सिंह को वह बच्चा मिला ।
'कर्फ्यू' उस दिन जिस दिन उस बच्चे ने बड़े होकर उस डाकू को मारा ।

संजय गुप्ता ने कथा लिखी , तरुण कुमार वाही द्वारा पठकथा, चित्रांकन मनु द्वारा और संपादन किया मनीष  गुप्ता ने।
सभी ने मिलकर एक ऐसा कथानक तैयार किया जिससे एक नया हीरो भारतीय कॉमिक्स में वज़ूद  में आया ।
डोगा की कॉमिक्स के लिए  एक नया प्रयोग किया गया ' कानून को तोड़कर कानून की रक्षा '।
इस कॉमिक्स की जितनी तारीफ़ की जाये कम है। इसमें वह सब कुछ है जो एक बेहतरीन कथानक में होना चहिये।
अंत में एक ही बात कहूंगा ' कॉमिक्स से मुँह मत मोड़िये', हो सकता है यह आपको कुछ सिखा  जाएं ।