Followers

Thursday, August 27, 2020

Comics Review : Chor Sipahi

बदमाशो से मुठभेड़ में डोगा के हथियार खत्म हो चुके हैं और उसे नए हथियारों की तलाश है। 
इस कथानक में डोगा को हथियार मिलने की कथा है।


हर रोज की तरह डोगा निकलता है रात को अपराधियों का काल बनकर। लेकिन इस बार उसके हथियार उसके साथ नहीं हैं। इस बार डोगा को चोर बाज़ार से हथियार खरीदने पड़े, रिवॉल्वर, मशीन गन और बम।
उसका सामना होता है सिक्स - T से। छः हैं वो और हैं सिक्स-टी। उनके सामने हथियार फेल हो जाने के बाद बड़ी मुश्किल से डोगा वहाँ से निकलता है।
अगले दिन डोगा अपने हथियारों की सप्लाई के लिए सीधे पुलिस headquarter में डाका डालने की योजना बनाता है। डोगा पहुच भी जाता है लेकिन एक मोटरसायकिल सवार आदमी की वजह से रुक जाता है, जिसे सिक्स टी आकर भून देते हैं।
वो आदमी डोगा को सब कुछ बता देता है कि सिक्स टी बिच्छू के पाले गुंडे है और हथियारों का एक जखीरा पोर्ट पर है। पीछे से पुलिस भी आ जाती है। इंस्पेक्टर चीता को भी वही बात बताया जो डोगा को बतायी थी। 
डोगा वादा करता है -  
चीता वादा करता है -
आगे मैं नही बताऊंगा, आप पढ़कर खुद जानिए कि डोगा और चीता ने अपने वादे कैसे पूरे किए, किये भी या नहीं।
चित्र शानदार और जानदार, कहानी दमदार ।
मेरी तरफ से 10 में से 9 गोलियाँ।



Wednesday, August 26, 2020

Comics Review : Gainda

डोगा - कानून तोड़कर जो करता है कानून की हिफाज़त। 
सूरज - डोगा का असली रूप, लायन जिम का बॉडी बिल्डर। सदा अपनी साधना में लगा रहता है और कैसे भी लड़ाई झगडे से दूर रहता है ताकि उसका डोगा होने का भेद न खुल जाये। 
चार भाई - अदरक, धनिया, काली मिर्च और हल्दी।  
अदरक ने सिखाई बॉडी बिल्डिंग , धनिया ने सिखाई बॉक्सिंग, काली मिर्च ने शूटिंग और हल्दी ने कराटे। 
इंस्पेक्टर चीता - खासम खास मुंबई पुलिस की शान। 



कहानी वही से शुरू होती है जहाँ अदरक चाचा में ख़त्म हुई थी। ठुमरी, बॉबी और काकू, तीनों टकरा गए चीता से जब चीता ने उनके साथी हड्डल को मार डाला। और एक अज्ञात बॉस गैंडा ने मालानगर की झुग्गी झोपडीयों  को तबाह करने का हुक्म सुना दिया। अब उन्हें लेना था बदला अपने साथी की मौत का। चीता और डोगा लग गए उनकी तलाश में। 

तीनो झुग्गियां जला देते हैं और निकल जाते है। गैंडा के संरक्षण में उनका आतंक बढ़ता ही जा रहा है , पहले माला नगर फिर शक्ति नगर।  और पीछे से शुरू होता है वह निर्माण कार्य। अगले काम को अंजाम देने से पहले ही डोगा ठुमरी को पकड़ लेता है और मार डालता है। इंस्पेक्टर चीता भी पीछे नहीं है , वो लग जाता है बॉबी और काकू के पीछे।  आखिर उन्हें एक डिपार्टमेंटल स्टोर में धर दबोचता है। मगर काकू उन्हें रेलिंग से बाँध देता है और बिजली का तार तोड़ देता है और लाम्बा को बिजली के झटके से मार देता है। 

जब तक काकू चीता की तरफ मुड़ता है, एक तूफ़ान सा आता है।  डोगा आता है और रेलिंग को उखाड़कर फेंक देता है। डोगा काकू को भी उसी तरह मारता है जिस तरह उसने लाम्बा को मारा था।  अब वो लगता है बॉबी के पीछे और वैन के नीचे लटका हुआ उनके अड्डे पर पहुँच जाता है। 

उसके बाद बॉबी और मिर्चा में लड़ाई होती है इतने में डोगा भी पहुंच जाता है।  फिर डोगा और बॉबी का घमासान होता है और डोगा कर देता है उसे बेहोश ।  फिर गैंडा को मारकर उसके अड्डे पर आग लगा देता है। 
डोगा, सूरज के रूप में चिट्ठी चीता तक पंहुचा देता है और फिर हर रोज की तरह जिम और गर्व महसूस करते अदरक चाचा। 

इस कहानी में पता चलता है की आखिर गैंडा कौन है। और उसको उसके अंजाम तक भी पंहुचा दिया जाता है। 

डोगा की शुरूआती कॉमिक्स में चित्रांकन एक फिल्म की तरह किया गया था, तो हर दृश्य जीवंत हो उठता है।  इस तरह का चित्रांकन भारतीय कॉमिक्स में बहुत ही काम देखने को मिलता है। 

इस कहानी और चित्रांकन के लिए मेरी तरफ से 10 में से 9 गोलियां। 

Saturday, April 11, 2020

Comics Review: Adrak Chacha

डोगा सीरीज की ये चौथी कॉमिक्स है। इसमें भी पिछली कॉमिक्स की तर्ज पर ही एक और किरदार के बारे में बताया गया है। इस बार वो किरदार है - अदरक चाचा।
अदरक चाचा - जो न सिर्फ सूरज के बल्कि  डोगा के भी खुदा हैं।  जिन्होंने एक  अनाथ  सूरज को अपनी शरण में लिया और उसको फौलाद बनाया और बनाया उस लायक कि वो हलकान सिंह से अपना बदला ले सके।
इस कहानी में ये भी बताय गया की अदरक  चाचा क्यों जरूरी हैं डोगा और सूरज की ज़िन्दगी में।

Reprint Cover



Original Cover


कई और किरदार इस कहानी में जोड़े गए हैं।  उनमे सबसे अहम है 'गेंडा'। गेंडा चार झुग्गी के बदमाशों - हड्डल, बॉबी (लड़की), ठुमरी और काकू को अपनी गैंग में शामिल करता है और दहशत फ़ैलाने का काम करवाता है।  पूरा पुलिस डिपार्टमैन्ट उनके पीछे लग जाता है और दुर्भाग्यवश अपने एक काबिल इंस्पेक्टर इं. चंडू को खो देता है। उधर सूरज अपने चाचा को दिए वचन की वजह से डोगा नहीं बनता।
चरों एक बार फिर धावा बोलते हैं लेकिन इस बार इंस्पेक्टर चीता हड्डल का काम तमाम कर देता है।  लेकिन अभी तक बात की तह तक नहीं पहुँचता।  कहानी ख़त्म होती है चीता के दिमाग में उमड़ते सवालों के साथ - "कौन है इस कत्ले-आम के पीछे? क्यों मरना चाहते थे वो चारों, लोगों को?"

लेखक: संजय गुप्ता
संपादन: मनीष गुप्ता
चित्रांकन: मनु

मनु जी द्वारा बनाये चित्र हमेशा की तरह जीवंत हो उठते हैं और बाँध कर रखते हैं।

इस कॉमिक्स को मेरी तरफ से 10 में से 8 गोलियां।

Tuesday, March 24, 2020

Comics Review : Main Hoon Doga

"सूरज जिसने बचपन से आज तक न जाने कितने जख्म खाए। उन जख्मों का हिसाब लेने के लिए कठिन तपस्याओं से गुजरकर वह बना डोगा। अब वह फौलादी बाँहों में बारूद उठाकर खड़ा हो गया है जख्म देने वालों के बीच थरथली मचाने के लिए। "

पहले पृष्ठ पर यह परिचय रौंगटे खड़े कर देता है।
'डोगा की कहानी सूरज की जुबानी। '




सूरज का पहला कारनामा - इंस्पेक्टर चीता से मजाक !!!
 डोगा का पहला कारनामा - किलर्स जिम के लड़कों की ठुकाई।
और इस तरह डोगा बता देता है की 'वह डोगा क्यों बना है ?' इस तरह कहानी शुरू होती है और सूरज का इंस्पेक्टर चीता से परिचय भी इसी कॉमिक्स में होता है। पूरा पुलिस डिपार्टमेंट जिस की सिर्फ खोजबीन में रह जाता है , वह जलजला - डोगा , काम करके निकल भी जाता है।

इस कॉमिक्स में सबसे बढ़िया किरदार इंस्पेक्टर चीता का लगा।  एक ऐसा कथानक जो आखिर तक आपको बांधे रख सके, वही कथानक है यह।
डायलॉग बाजी कहीं भी काम नहीं हुई।  बल्कि बढ़ी ही है।  ऐसी डायलॉग बाजी कहीं और देखने को नहीं मिल सकती।  चित्रों की तो पूछिए मत, ऐसा लगता है जिन्दा आदमी को ही देख रहे हैं और जो चेहरे के भाव हैं, एकदम सजीव।

लेखक: तरुण कुमार वाही , संजय गुप्ता
चित्रांकन : मनु
संपादक : मनीष गुप्ता

इस कॉमिक्स को मेरी तरफ से 10 में से 8 गोलियाँ।

Reprint Cover




Tuesday, September 6, 2016

Comics Review : Yeh Hai Doga



Comics Name : Yeh hai Doga
Volume : Doga
Issue Number : 2
Publisher : Raj Comics
Release Date : 1 January 1993
Author: Tarun Kumar Wahi, sanjay Gupta
Penciler: Manu

जिस कहानी का परिचय ही भर मिलता है ' कर्फ्यू ' में, वही कहानी है 'ये है डोगा '।  यह कहानी  अदरक चाचा की ज़ुबानी है।  इसमें भी डोगा कैसे बना ये दिखाया गया है। बस इस बार कहानी अदरक  चाचा की नज़र  से है।  इसी में अदरक चाचा को पहली बार दिखाया गया है  और लायन जिम  से सूरज का रिश्ता भी बख़ूबी दिखाया गया है।

 चित्रों की बात करें तो एक ही बात कहूँगा की मनु जी ने  कमाल कर दिया । उनके चित्रित क़िरदार सजीव हो उठते है। कलरिंग बहुत ही बढ़िया हुई है।   पढ़ते वक़्त बिल्कुल महसूस नहीं होता की कॉमिक्स पढ़ी जा रही है। यह उस तरह की कॉमिक्स है जिसे आप बार-बार पढ़ना चाहेंगे ।

मेरी तरफ़ से इस कॉमिक्स को 10 में से 9 गोलियाँ ।

Reprint cover:

Friday, April 1, 2016

Comics Review: Curfew

आज मैंने राज कॉमिक्स द्वारा प्रकाशित कॉमिक्स "कर्फ्यू " पढ़ी । मैं हमेशा से ही डोगा का प्रशंसक रहा हूँ । डोगा की सभी कहानियां ज्यादातर वास्तविकता के ज़्यादा करीब रहती हैं । यही कॉमिक्स है डोगा की सबसे पहली कॉमिक्स । कॉमिक्स नार्मल पेपर पर है.। बेहतरीन कहानी और चित्रों के साथ ये कॉमिक शुरू करती है ऐसे जलजले को जो आज तक भी ख़त्म नहीं हुआ.। डोगा मशहूर है अपनी सिर्फ एक बात से और वह है उसकी ये सोच - 'डोगा जुर्म को ख़त्म नहीं करता बल्कि उसे जड़ से उखड फेंकता है '।  डोगा की ओरिजिन के बारे में जिस तरह से दिखाया गया है वह बहुत ही दिलचस्प है ।

Original Cover


 

और कुछ बताने से पहले थोड़ा सा डोगा के बारे में --
"जुर्म की गलियों से निकला वह कुत्ता है डोगा जो जुर्म को काटने और चीर फाड़ डालने को उतारू है।  डाकू हलकान सिंह को पुलिस से भागते हुए  मिला एक नवजात बच्चा । वो उसके सहारे हो जाता है फ़रार । उसको नाम देता है 'कुत्ता'। एक दिन एक लड़की को बंदी बन लेता है हलकान । वो लड़की  उस कुत्ते को  बुलाती है सूरज । जब सूरज को पता चलता है की हलकान उस लड़की को मार देगा तो उस लड़की को बचा लेता है और हलकान के अड्डे पर पुलिस रेड पड़वा देता है   और  खुद  पहुंच जाता हैँ  मुम्बई । उसके आगे क्या होता है यही है सारी  कहानी। जिस कुत्ते का उसने नक़ाब पहना उसकी वफादारी भी भरपूर निभाई । हलकान सिंह की पहली गोली खाकर चुकाता  है अपना क़र्ज़ और  उसे मारकर निभाता है इंसानियत का फ़र्ज़। पर अभी उसपर इंसानियत का एक क़र्ज़ बाकी है इसलिए हर रोज़ रात को कुत्ते का नकाब पहनकर उसे चुकाता है।"
कहानी की शुरुआत बेहद नाटकीय रूप से होती है फिर कहानी में हलकान सिंह पर ध्यान केंद्रित किया जाता है ।   और फिर उसके बाद कहानी के निष्कर्ष पर पहुंचते हैं जहाँ डोगा अदरक चाचा की बाँहों में खून बहाए  है।
कॉमिक्स का टाइटल ही सब कुछ बखान कर देता है। 'कर्फ्यू '।
'कर्फ्यू' उस दिन जिस दिन हलकान सिंह को वह बच्चा मिला ।
'कर्फ्यू' उस दिन जिस दिन उस बच्चे ने बड़े होकर उस डाकू को मारा ।

संजय गुप्ता ने कथा लिखी , तरुण कुमार वाही द्वारा पठकथा, चित्रांकन मनु द्वारा और संपादन किया मनीष  गुप्ता ने।
सभी ने मिलकर एक ऐसा कथानक तैयार किया जिससे एक नया हीरो भारतीय कॉमिक्स में वज़ूद  में आया ।
डोगा की कॉमिक्स के लिए  एक नया प्रयोग किया गया ' कानून को तोड़कर कानून की रक्षा '।
इस कॉमिक्स की जितनी तारीफ़ की जाये कम है। इसमें वह सब कुछ है जो एक बेहतरीन कथानक में होना चहिये।
अंत में एक ही बात कहूंगा ' कॉमिक्स से मुँह मत मोड़िये', हो सकता है यह आपको कुछ सिखा  जाएं ।