"सूरज जिसने बचपन से आज तक न जाने कितने जख्म खाए। उन जख्मों का हिसाब लेने के लिए कठिन तपस्याओं से गुजरकर वह बना डोगा। अब वह फौलादी बाँहों में बारूद उठाकर खड़ा हो गया है जख्म देने वालों के बीच थरथली मचाने के लिए। "
पहले पृष्ठ पर यह परिचय रौंगटे खड़े कर देता है।
'डोगा की कहानी सूरज की जुबानी। '
सूरज का पहला कारनामा - इंस्पेक्टर चीता से मजाक !!!
डोगा का पहला कारनामा - किलर्स जिम के लड़कों की ठुकाई।
और इस तरह डोगा बता देता है की 'वह डोगा क्यों बना है ?' इस तरह कहानी शुरू होती है और सूरज का इंस्पेक्टर चीता से परिचय भी इसी कॉमिक्स में होता है। पूरा पुलिस डिपार्टमेंट जिस की सिर्फ खोजबीन में रह जाता है , वह जलजला - डोगा , काम करके निकल भी जाता है।
इस कॉमिक्स में सबसे बढ़िया किरदार इंस्पेक्टर चीता का लगा। एक ऐसा कथानक जो आखिर तक आपको बांधे रख सके, वही कथानक है यह।
डायलॉग बाजी कहीं भी काम नहीं हुई। बल्कि बढ़ी ही है। ऐसी डायलॉग बाजी कहीं और देखने को नहीं मिल सकती। चित्रों की तो पूछिए मत, ऐसा लगता है जिन्दा आदमी को ही देख रहे हैं और जो चेहरे के भाव हैं, एकदम सजीव।
लेखक: तरुण कुमार वाही , संजय गुप्ता
चित्रांकन : मनु
संपादक : मनीष गुप्ता
इस कॉमिक्स को मेरी तरफ से 10 में से 8 गोलियाँ।
Reprint Cover
पहले पृष्ठ पर यह परिचय रौंगटे खड़े कर देता है।
'डोगा की कहानी सूरज की जुबानी। '
सूरज का पहला कारनामा - इंस्पेक्टर चीता से मजाक !!!
डोगा का पहला कारनामा - किलर्स जिम के लड़कों की ठुकाई।
और इस तरह डोगा बता देता है की 'वह डोगा क्यों बना है ?' इस तरह कहानी शुरू होती है और सूरज का इंस्पेक्टर चीता से परिचय भी इसी कॉमिक्स में होता है। पूरा पुलिस डिपार्टमेंट जिस की सिर्फ खोजबीन में रह जाता है , वह जलजला - डोगा , काम करके निकल भी जाता है।
इस कॉमिक्स में सबसे बढ़िया किरदार इंस्पेक्टर चीता का लगा। एक ऐसा कथानक जो आखिर तक आपको बांधे रख सके, वही कथानक है यह।
डायलॉग बाजी कहीं भी काम नहीं हुई। बल्कि बढ़ी ही है। ऐसी डायलॉग बाजी कहीं और देखने को नहीं मिल सकती। चित्रों की तो पूछिए मत, ऐसा लगता है जिन्दा आदमी को ही देख रहे हैं और जो चेहरे के भाव हैं, एकदम सजीव।
लेखक: तरुण कुमार वाही , संजय गुप्ता
चित्रांकन : मनु
संपादक : मनीष गुप्ता
इस कॉमिक्स को मेरी तरफ से 10 में से 8 गोलियाँ।
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